अभिमन्यु एक वीर योद्धा
जब-जब इस धरती पर अधर्म बड़ा है, तब समय-समय पर स्वयं ईश्वार और देवताओं ने इस धरती पर मानव रूप में जन्म लेकर फिरसे धर्म की स्थापना की है, उसी प्रकार इन देवताओं के पुत्रो ने भी धर्म स्थापना के लिए धरती पर जन्म लिया था। महाभारत की कथाओ के अनुसार अभीमन्यु को चंद्रदेव का पुत्र भी माना जाता है, एक पौराणिक कथा के अनुसार संसार में अधर्म बढ़ने के कारण सभी देवताओ ने अपने पुत्रो को अवतार रूप में धरती पर भेजा था ताकि वह असुर शक्तियों से लड़ सके परंतु चंद्रदेव अपने पुत्र का वियोग सहन नही कर सकते थे अतः उनका पुत्र केवल 16 वर्ष तक की आयु के लिए ही इस धरती पर जन्मा था। जब अभिमन्यु ने अपनी माता सुभद्रा की कोख थे, तब अर्जुन ने सुभद्रा को चक्रव्यूह भेदने का रहस्य बता रहे थे, जिसे अभिमन्यु ने कोख में ही सुन लिया था,पर सुभद्रा के बीच में ही सो जाने के कारण वे व्यूह से बाहर आने की विधि नहीं जान पाया जिसका परिणाम हुआ उनकी मृत्यु । द्यूतक्रीड़ा हारने के बाद, द्रौपदी के साथ सभी पांडवों को 13 वर्ष के लिए वनवास भेज दिया गया था। इस अवधि के दौरान, सुभद्रा अपने भाइयों के साथ द्वारका म...